कक्षा 10 हिंदी | ४. मन (पूरक पठन) | स्वाध्याय प्रश्न-उत्तर

 

४. मन — (पूरक पठन)

सूचना के अनुसार कृतियाँ

(१) उचित जोड़ियाँ मिलाइए :

मछली — प्यासी

गीतों के स्वर — अमर

रेल की पटरियाँ — मौन

आकाश — सूना

अतिरिक्त शब्द: पीड़ा

(२) परिणाम लिखिए :

१. सितारों का छिपना — बादलों की ओट में सितारे छिप गए।

२. तुम्हारा गीतों को स्वर देना — गीत अमर हुए।

(३) सरल अर्थ लिखिए :

मन की पीड़ा बरसी आँखें।

अर्थ: दुःख के कारण आँखों से आँसू बहने लगे।

शब्द संसार

१. मँझधार — नदी के प्रवाह का मध्यभाग

२. कुंठा — घोर निराशा

३. विवाद — अभिलाषा पूरी न होने पर मन में होने वाला खेद या दुःख

४. जिजीविषा — जीवन के प्रति आसक्ति / जीने की इच्छा

५. ओट — आड़


स्वाध्याय 



(१) लिखिए : हाइकु द्वारा मिलने वाला संदेश

क. करते जाओ पाने की मत सोचो जीवन सारा।

उत्तर: हमें जीवनभर अपना कर्म करते रहना चाहिए और उसके फल की चिंता नहीं करनी चाहिए।

ख. भीतरी कुंठा नयनों के द्वार से आई बाहर।

उत्तर: जब मन में दुःख या निराशा होती है, तो वह आँसुओं के रूप में आँखों से बाहर आ जाती है।

(२) कृति पूर्ण कीजिए



हाइकु में प्रयुक्त महीना और उसकी ऋतु :

१. फागुन — वसंत ऋतु

२. बसंत — वसंत ऋतु

(३) उत्तर लिखिए

१. मँझधार में डोले — जीवन नैया

२. छिपे हुए — सितारे

३. धुल गए — विवाद

४. अमर हुए — गीत

(४) निम्नलिखित काव्य-पंक्तियों का केंद्रीय भाव स्पष्ट कीजिए

१. चलती साथ
पटरियाँ रेल की
फिर भी मौन।

उत्तर: रेल की पटरियाँ हमेशा साथ-साथ चलती हैं, फिर भी वे एक-दूसरे से बात नहीं करतीं। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने साथ रहने के बावजूद मौन भाव को व्यक्त किया है।

२. काँटों के बीच
खिलखिलाता फूल
देता प्रेरणा।

उत्तर: काँटों के बीच खिलने वाला फूल हमें कठिन परिस्थितियों में भी प्रसन्न रहने और आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देता है। हमें परेशानियों से घबराए बिना जीवन में मुस्कुराते रहना चाहिए।



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